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मजदूर दिवस या .मजा .दुर दिवस

Posted On: 1 May, 2015 Junction Forum,Hindi Sahitya,Others में

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मजदूर ……या मजा ……….दूर दिवस
कल कोई अखबार नहीं आएगा क्योकि आज मजदूर दिवस है | आज ना जाने कितने संगठनों ने मजदूर दिवस मनाया होगा | क्या मैं घर में खाना बना रही महिला , माँ , पत्नी बहन को मजदूरर कह सकते है !!! मजदूर !! क्या दिमाग ख़राब हुआ है वो तो अन्नपूर्णा है उन्ही के कारण तो हम सबको भोजन मिलता है पर उन्हें क्या मिलता है ? बिना किसी मजदूरी के हमरे सुख दुःख का ख्याल करने वाली इस महिलाओ के लिए मजदूर शब्द क्यों नहीं ??? पर जो आप सुन्ना चाहते है उन्ही को मजदूर कहना पड़ेगा
लेकिन वो कौन है जो ठेके पर , अंश कलिक , अतिथि प्रवक्ता के रूप में पढ़ाते है | जिसे आप मजदूर कहते है उसकी मजदूरी है ३५० रूपया प्रतिदिन पर इस उच्च शिक्षा के शिक्षको को ७००० या ८००० मासिक मिलते है पर ये भी मजदूर नहीं हो सकते क्योकि आप नहीं मानते ? क्या इनके ऊपर कोई सोचेगा ??
अच्छा जो किसान अपनी मेहनत को बर्बाद होते देख कर आत्महत्या कर रहे है क्यों वो मजदूर नहीं !!! आरे क्या आप पागल हो गए है वो तो अन्न दाता है जिस=नके डैम पर पूरा राष्ट्र खाता है | उनके पास अपने खेत है वो बात अलग है कि उनके पास कपडे नहीं है , कच्चे मकान है | बिजली नहीं है , पानी नहीं है , उच्च शिक्षा नहीं है , अच्छी स्वास्थ्य सुविधा नहीं है पर उनको गलती से भी मजदूर ना कहियेगा !!!
तो ये मजदूर है कौन ????? जी जी क्या बात है आप कितने सच्चे राष्ट्र भक्त है जी वही लोग मजदूर है जो कामरेड है , जो जिन्दा बाद मुर्दाबाद लगा ते है जो कारखाने बंद करा देते है और यही नहीं जो एक दिन में चक्का जाम कर के सरकार को घुटनो पर टिका देते है | अब आप समझ गए होंगे कि मजदूर कौन है पर जिन लोगो के बारे में मैंने कहा वो क्यों मजदूर नहीं …………..पर मजदूर तो वही है  ना जिनसे मजा दूर ( मजदूर = मजा +दूर ) नहीं है वो हर समय अपने सुख , वेतन , सुविधाओ के लिए लड़ रहे है | और एक माँ पति , शिक्षक , किसान इस देश के आधार है संस्कृति है ना कि मजदूर  इस लिए उनके लिए मजदूर दिवस !!!!!!!!!!! जी मजा …………दूर है ..तो आज समझ गए ना मजदूर दिवस का दर्शन !!!!!! अरे ये क्या आप कहा चले क्या आपको मजदूर दिवस को सम्बोधित करना है .अरे चाय तो पिटे जैसे देखिये बिना दिहाड़ी की मजदूर आपकी पत्नी ने बनाई है जिसकी उस कोई कीमत नहीं मिलेगी सिवाए आत्मिक सुख के ……………कभी ऐसे मजदूर और मजदूरी के लिए भी सोच लीजिये किसी १ मई को ………………..आप सभी को मई दिवस की शुभकामना ( अखिल भारतीय अधिकार संगठन )

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1 प्रतिक्रिया

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jlsingh के द्वारा
May 3, 2015

बात तो ठीक है आपने अख़बार से बात शुरू की यानी अखबार वाले मजदूर है पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जो दिन रात चालू रहता है कभी बंद नहीं होता इनकी भी दशा देखता हूँ तो कभी कभी सोच में पर जाता हूँ. हर घटना को लाइव और पहले दिखने की प्रतियोगिता में पिसता तो रिपोर्टर ही न! घरेलू महिलाओं की बात भी उचित है …पर उसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं.


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