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Human rights is becoming a culture in the era of Nation-State concept....now a person leads to behaviour .one is governed by his/her conventional culture and other one is administered by human rights culture in the nation -state frame.so this resonance gives a space to discuss human being in the frame of human rights instead of his conventional culture...this blog will discuss all aspects of life regarding Human rigts

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आओ अब जागने की बारी हैं

Posted On: 22 Dec, 2012 Others में

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दर्द में डूब रही है आज रात मेरी ……………दर्द से ऊब रही है आज रात मेरी  ………….ऐसे दर्द का लम्हा गुजरा उसके तन मन से ……………………भारत के मैले आंचल में आज रात है मेरी ………………..ये कैसी रात है जो ढोल पीट सो जाते सभी ………….वो रोती बिलखती सोचती मौत क्या होगी कभी …………….कौन कहता है ये देश है भाई बहन का आलोक ……………….हर रात किसी की इज्जत तार तार हुई अभी ……………………….केवल यह मत कहिये की रेप करने वालो को सजा दो बल्कि देश के संविधान के निति निदेशक तत्व की ५१अ के अंतरगत  महिला की अस्मिता और गरिमा के लिए कानून बनाना चाहिए | ना जाने क्यों सैकड़ो कानून बना कर देश महिलाओ को भ्रमित कर रहा है …………………सोचिये और कहिये ना शुभ रात्रि



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    allindianrightsorganization के द्वारा
    December 23, 2012

    मानव होने का मर्म हम भूल रहे है …………………..औरत के लिए हम शूल रहे है ………..आपकी टिप्पड़ीके लिए धन्यवाद्


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