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Human rights is becoming a culture in the era of Nation-State concept....now a person leads to behaviour .one is governed by his/her conventional culture and other one is administered by human rights culture in the nation -state frame.so this resonance gives a space to discuss human being in the frame of human rights instead of his conventional culture...this blog will discuss all aspects of life regarding Human rigts

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रात मिला गयी मुझको

Posted On: 6 Dec, 2012 Others में

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रात ने हमको तारो से मिलाया ………………रात ने सपनो को पास बुलाया ……….. आलिंगन का दौर बंद पलकों में ……………………. रात ने सृजन का मतलब समझाया ……………..रात से मिलकर थकान का एहसास ………………एक पल सोने का मजा मुझे दिखाया ………………….आलोक को क्यों पूछूं जब रात है …………………सुहाग को सुहागा सोने सा बनाया …………………कहते है रात यानि कालिमा का अपना ही मजा है और अगर रात ना होती तो सुकून के वो क्षण न होते जिनके सहारे हम खुद को महसूस करते है ……………..सच है ना तो कहिये शुभरात्रि



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mayankkumar के द्वारा
December 7, 2012

आपका लेख सदैव ही आत्मविष्वास से ओत-प्रोत व रोचकता की किरण के समान रहा है …. !! सधन्यवाद … !! हमारे ब्लाॅग पर भी पधारें … !!!

    allindianrightsorganization के द्वारा
    December 11, 2012

    आप लोगो का स्नेह ही मुझे प्रेरित करता है कि मैं कुछ बेहतर लिख सकूँ , आपका साधुवाद

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 7, 2012

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें. आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    allindianrightsorganization के द्वारा
    December 11, 2012

    जीवन में आप शब्द से अगर प्रेम करने लगे तो उसके रंग इतने मधुर हो जाते है कि आप जैसे मनीषी को बहाना लगते है ……………….धन्यवाद्


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